Wednesday 23 August 2023

करोड़पतियों का गांव कहते है इसे ,भारत में ही है

  करोड़पतियों का गांव कहते है इसे ,भारत में ही है 


गांव शब्द सुनते ही जो छवि आप के दिमाग में वहां के लोगो व वहां  की परिस्थितियो की   आती है आज वो बदल जाएगी 



करोड़पतियों का गांव



भारत में अनगिनत गांव है ,असली भारत  तो बस्ता ही गांवो  में है। 

भारत के हर व्यक्ति की जड़े या दिमाग कंही न कंही गावों से जरूर जुड़ा हुआ होता है 


तुम काले हो तुमसे हमारा स्टेट्स मेल नहीं खाता , नौकरी के लगते ही बदल गई पत्नी, ज्योति मौर्य की तरह पति को छोड़ा



 

किस गांव को कहा जाता है करोड़पतियों का गांव

भारत के महाराष्ट्र राज्य में  अहमदनगर जिले में  एक गांव है हिवरे बाजार(Hiware Bazaar)  इसे  करोड़पतियों का गांव कहा जाता है।  इस  हिवरे बाजार(Hiware Bazaar)  गांव में करीब 300 से अधिक परिवार रहते हैं, जिसमें से 70 से अधिक परिवार करोड़पति हैं। 

 




गांव में नहीं  है मच्छर

 इस गांव में मच्छर नहीं मिलता है। क्योकि  गांव वाले मच्छरों को प्राकृतिक तरीको व  सफाई रख कर  पनपने ही नहीं देते है   इस गांव को मच्छर मुक्त गांव भी कहा जाता है। 

 राम दुलारी मायके गई………….

Jagranjosh

कभी सूखे से ग्रसित था गांव

महाराष्ट्र के इस गांव में  80-90 के दशक में  सूखा पड़ने लगा था, इस कारण यहां के  लोग गांव  छोड़ कर जाने लग गए  थे। कुछ लोग ऐसे भी थे, जिन्होंने यहां रूककर समस्या का हल   करने की  सोची।


इन बहादुर लोगो ने  गांव में कुएं खोदने के साथ पेड़ लगाने की शुरु किये । गांव वालों ने फॉरेस्ट मैनेजमेंट कमेटी का गठन किया, जिसे महाराष्ट्र सरकार की ओर से फंड दिया गया,,एक दिन मेहनत रंग लायी  वे  यहां का जलस्तर बढ़ने लगा। 


 


 फसलें उगाते हैं कम पानी वाली गांव के लोग

गांव के लोग यहां पर कम पानी वाली फसलें उगाते है ताकि पनि बचा  सके  हैं। यहां के किसान  ज्वार और बाजरा व आलू और प्याज की खेती भी करते हैं।

 इस गांव में रहने वाले 50 से अधिक परिवार की वार्षिक आय 50 लाख रुपये से अधिक है। 

 



                                                               NEWS

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ऐसा क्या हुआ था आखिर उस रात, उस गांव में की … इंसान, जानवर कीड़े मकोड़े मक्खियां तक जिंदा नहीं बची थीं

 ऐसा क्या हुआ था  आखिर उस रात, उस  गांव में की … इंसान, जानवर  कीड़े मकोड़े   मक्खियां तक जिंदा नहीं बची थीं 

21 अगस्त 1986 की रात लगभग 9 बजे एक पश्चिमी अफ्रीकी गांव न्योस [Nyos] में लोगों ने बहुत भयंकर   गड़गड़ाहट की आवाज सुनी. अगली सुबह  जब  एफ़्रैम चे [Ephraim Che] उठा तो पाया कि लगभग सभी लोग जिन्हें वह जानता था वह मर चुके थे.

Nyos Lake disaster- मरे पड़े जानवर [Image-Twitter/@museumsireland]

Nyos Lake disaster- मरे पड़े जानवर 

. ‘कार्बन डाइऑक्साइड’ गैस ने एक ‘साइलेंट किलर’ की तरह काम करती है 

 . इंसानों, जानवरों , मक्खियों,कीड़ो मकोड़ो  का भी दम घुट गया. ‘न्योस डिजास्टर लेक घटना में 

   1746 लोगों और लगभग 3,500 जानवरों की मृत्यु हो गई थी. 



 

21 अगस्त 1986 की रात लगभग 9 बजे एक पश्चिमी अफ्रीकी गांव न्योस [Nyos] में लोगों ने बहुत भयंकर   गड़गड़ाहट की आवाज सुनी. अगली सुबह  जब  एफ़्रैम चे [Ephraim Che] उठा तो पाया कि लगभग सभी लोग जिन्हें वह जानता था वह मर चुके थे.

पूरे गांव में मौत सन्नाटा एक रूह को कंपा देने वाली ख़ामोशी  पसरी  हुइ  थी  , एफ़्रैम के होश उड़ गए. अचानक उसने  एक महिला के रोने की आवाज सुनी ,  वह महिला के पास गया    वह महिला हलीमा थी, जिसे वह जानता था.


 हलीमा दुःख से पागल हो चुकी थी  उसने अपने कपड़े फाड़ दिए थे.

 हलीमा बुरी तरह से चिल्ला  रही थी. 

 एफ़्रैम ने अपने परिवार के 30 अन्य सदस्यों और उनके  लगभग 400 जानवरों को देखा.ऐफ्रेम के अनुसार  ‘उस दिन मृतकों पर कोई मक्खियां नहीं थीं.  कीड़े भी  नहीं थे  ‘न्योस लेक डिजास्टर’ प्रकोप से   बचे   एफ़्रैम और हलीमा की बातें रूह को कंपा देती  हैं.




न्योस लेक डिजास्टर के कारण  


न्योस झील  आपदा का मुख्य कारण झील की गहराई  में  कार्बन डाइऑक्साइड गैस का जमा होना था,जब यह गैस का एक विस्फोट के साथ झील से बहार आयी व पुरे गांव में फ़ैल गयी ,जिससे हजारो जानवर,पशु,मखिया ,व कीड़े मकोड़े सभी मर गए ,झील में से बहुत गन्दी दुर्गन्ध आ रही थी जब बाद में लोग वहां पहुंचे,बाद में इस बात की पुष्टि हुयी की गैस झील में से ही निकली थी 


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