Thursday 4 July 2024

108 ka Hindhi Dharam me Mehtav

संख्या 108 का रहस्य और महत्व
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॥ॐ॥ का जप करते समय 108 प्रकार की विशेष भेदक ध्वनी तरंगे उत्पन्न होती है जो किसी भी प्रकार के शारीरिक व मानसिक घातक रोगों के कारण का समूल विनाश व शारीरिक व मानसिक विकास का मूल कारण है। बौद्धिक विकास व स्मरण शक्ति के विकास में अत्यन्त प्रबल कारण है । 

॥ 108 ॥
यह अद्भुत व चमत्कारी अंक बहुत समय ( काल ) से हमारे ऋषि -मुनियों के नाम के साथ प्रयोग होता रहा है।  

*★ आइये जाने संख्या 108 का रहस्य ★*
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*स्वरमाला*
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अ→1 ... आ→2... इ→3 ... ई→4 ... उ→5... ऊ→6  ... ए→7 ... ऐ→8 ओ→9 ... औ→10 ... ऋ→11 ... लृ→12
अं→13 ... अ:→14.. 
ऋॄ →15.. लॄ →16

*व्यंजनमाला*
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क→1 ... ख→2 ... ग→3 ... घ→4 ...
ङ→5 ... च→6... छ→7 ... ज→8 ...
झ→9... ञ→10 ... ट→11 ... ठ→12 ...
ड→13 ... ढ→14 ... ण→१15 ... त→16 ...
थ→17... द→18 ... ध→19 ... न→20 ...
प→21 ... फ→22 ... ब→23 ... भ→24 ...
म→25 ... य→26 ... र→27 ... ल→28 ...
व→29 ... श→30 ... ष→31 ... स→32 ...
ह→33 ... क्ष→34 ... त्र→35 ... ज्ञ→36 ...
ड़ 37   ... ढ़ ... 38
--~~~ओ अहं = ब्रह्म ~~~--
ब्रह्म = ब+र+ह+म =23+27+33+25=108

*( 1 )* 

यह मात्रिकाएँ (16स्वर +38 व्यंजन=54 ) नाभि से आरम्भ होकर ओष्टों तक आती है, इनका एक बार चढ़ाव, दूसरी बार उतार होता है, दोनों बार में वे 108 की संख्या बन जाती हैं। इस प्रकार 108 मंत्र जप से नाभि चक्र से लेकर जिव्हाग्र तक की 108 सूक्ष्म तन्मात्राओं का प्रस्फुरण हो जाता है। अधिक जितना हो सके उतना उत्तम है पर नित्य कम से कम 108 मंत्रों का जप तो करना ही चाहिए ।।

*( 2 )* 

मनुष्य शरीर की ऊँचाई
= यज्ञोपवीत(जनेउ) की परिधि 
= ( 4 अँगुलियों) का 27 गुणा होती है। 
= 4 × 27 = 108

*( 3 )* 

नक्षत्रों की कुल संख्या = 27
प्रत्येक नक्षत्र के चरण = 4
जप की विशिष्ट संख्या = 108
अर्थात् ॐ मंत्र जप कम से कम 108 बार करना चाहिये ।

*( 4 )* 

एक अद्भुत अनुपातिक रहस्य
★ पृथ्वी से सूर्य की दूरी/ सूर्य का व्यास=108
★ पृथ्वी से चन्द्र की दूरी/ चन्द्र का व्यास=108
अर्थात् मन्त्र जप 108 से कम नहीं करना चाहिये।

*( 5 )* 

हिंसात्मक पापों की संख्या 36 मानी गई है जो मन, वचन व कर्म 3 प्रकार से होते है। अर्थात् 36×3=108। अत: पाप कर्म संस्कार निवृत्ति हेतु किये गये मंत्र जप को कम से कम 108 अवश्य ही करना चाहिये।

*( 6 )* 

सामान्यत: 24 घंटे में एक व्यक्ति 21600 बार सांस लेता है। दिन-रात के 24 घंटों में से 12 घंटे सोने व गृहस्थ कर्तव्य में व्यतीत हो जाते हैं और शेष 12 घंटों में व्यक्ति जो सांस लेता है वह है 10800 बार। इस समय में ईश्वर का ध्यान करना चाहिए । शास्त्रों के अनुसार व्यक्ति को हर सांस पर ईश्वर का ध्यान करना चाहिये । इसीलिए 10800 की इसी संख्या के आधार पर जप के लिये 108 की संख्या निर्धारित करते हैं।

*( 7 )* 

एक वर्ष में सूर्य 216000 कलाएं बदलता है। सूर्य वर्ष में दो बार अपनी स्थिति भी बदलता है। छःमाह उत्तरायण में रहता है और छः माह
दक्षिणायन में। अत: सूर्य छः माह की एक स्थिति
में 108000 बार कलाएं बदलता है।

*( 8 ) 786 का भी हिंदू आध्यात्मिक जवाब — ॥ 108 ॥*

*( 9 )* 

ब्रह्मांड को 12 भागों में विभाजित किया गया है। इन 12 भागों के नाम - मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन हैं। इन 12 राशियों में नौ ग्रह सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु विचरण करते हैं। अत: ग्रहों की संख्या 9 में राशियों की संख्या  को 12 से गुणा करें तो संख्या 108 प्राप्त हो जाती है।

*( 10 )* 

108 में तीन अंक हैं, 1, 0 , 8. इनमें एक “1" ईश्वर का प्रतीक है। ईश्वर का एक सत्ता है अर्थात ईश्वर १ है और मन भी एक है, शून्य “0" प्रकृति को दर्शाता है। आठ “8" जीवात्मा को दर्शाता है क्योंकि योग के अष्टांग नियमों से ही जीव प्रभु से मिल सकता है । जो व्यक्ति अष्टांग योग द्वारा प्रकृति के आठो मूल से  विरक्त हो कर ईश्वर का साक्षात्कार कर लेता है उसे सिद्ध पुरुष कहते हैं। जीव “8" को परमपिता परमात्मा से मिलने के लिए प्रकृति “0" का सहारा लेना पड़ता है। ईश्वर और जीव के बीच में प्रकृति है। आत्मा जब प्रकृति को शून्य समझता है तभी ईश्वर “1" का साक्षात्कार कर सकता है। प्रकृति “0" में क्षणिक सुख है और परमात्मा में अनंत और असीम। जब तक जीव प्रकृति “0" को जो कि जड़ है उसका त्याग नहीं करेगा , अर्थात शून्य नही करेगा, मोह माया को नहीं त्यागेगा तब तक जीव “8" ईश्वर “1" से नहीं मिल पायेगा, पूर्णता ( 1+8 =9 ) को नहीं प्राप्त कर पायेगा ।
9 पूर्णता (पूर्णांक )का सूचक है।

*( 11 )* 

1- ईश्वर और मन
2- द्वैत, दुनिया, संसार
3- गुण प्रकृति (माया)
4- अवस्था भेद (वर्ण)
5- इन्द्रियाँ
6- विकार
7- सप्तऋषि, सप्तसोपान
8- आष्टांग योग
9- नवधा भक्ति (पूर्णता)

*( 12 )* 

वैदिक विचार धारा में मनुस्मृति के अनुसार 

अहंकार के गुण = 2
बुद्धि के गुण = 3
मन के गुण = 4
आकाश के गुण = 5
वायु के गुण = 6
अग्नि के गुण = 7
जल के गुण = 8
पॄथ्वी के गुण = 9
2+3+4+5+6+7+8+9 =
अत: प्रकृति के कुल गुण = 44
जीव के गुण = 10
इस प्रकार संख्या का योग = 54 
अत: सृष्टि उत्पत्ति की संख्या = 54
एवं सृष्टि प्रलय की संख्या = 54
दोंनों संख्याओं का योग = 108

*( 13 )*

संख्या “1" एक ईश्वर का संकेत है।
संख्या “0" जड़ प्रकृति का संकेत है।
संख्या “8" बहुआयामी जीवात्मा का संकेत है।
यह तीन अनादि परम वैदिक सत्य हैं 
यही पवित्र त्रेतवाद है 

संख्या “2" से “9" तक एक बात सत्य है कि इन्हीं आठ अंकों में “0" रूपी स्थान पर जीवन है। इसलिये यदि “0" न हो तो कोई क्रम गणना आदि नहीं हो सकती। “1" की चेतना से “8" का खेल । “8" यानी “2" से “9" । 
यह “8" क्या है ? मन के “8" वर्ग या भाव । 

*ये आठ भाव ये हैं।*

1. काम ( विभिन्न इच्छायें / वासनायें ) । 2. क्रोध । 3. लोभ । 4. मोह । 5. मद ( घमण्ड ) । 6. मत्सर ( जलन ) । 7. ज्ञान । 8. वैराग । 

एक सामान्य आत्मा से महानात्मा तक की यात्रा का प्रतीक है 
 ॥ 108 ॥ 
इन आठ भावों में जीवन का ये खेल चल रहा है ।

*( 14 )*

सौर परिवार के प्रमुख सूर्य के एक ओर से नौ रश्मियां निकलती हैं और ये चारो ओर से अलग-अलग निकलती है। इस तरह कुल 36 रश्मियां हो गई। इन 36 रश्मियों के ध्वनियों पर संस्कृत के 36 स्वर बनें ।

इस तरह सूर्य की जब नौ रश्मियां पृथ्वी पर आती हैं तो उनका पृथ्वी के आठ वसुओं से टक्कर होती हैं। सूर्य की नौ रश्मियां और पृथ्वी के आठ वसुओं के आपस में टकराने से जो 72 प्रकार की ध्वनियां उत्पन्न हुई वे संस्कृत के 72 व्यंजन बन गई। इस प्रकार ब्रह्मांड में निकलने वाली कुल 108 ध्वनियाँ पर संस्कृत की वर्ण माला आधारित है।

रहस्यमय संख्या 108 का हिन्दू- वैदिक संस्कृति के साथ हजारों सम्बन्ध हैं जिनमें से कुछ का संग्रह है।

साभार
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Sunday 2 June 2024

आपको शायद यकीन न हो, लेकिन ये सच है

48 डिग्री में उबल रहा शहर, मगर इन कॉलोनियों के किसी घर में AC नहीं, IAS अफसर भी पंखे से काम है.  चला रहे है.
 आपको शायद यकीन न हो, लेकिन ये सच है. यहां आज भी AC लगाने पर पाबंदी है. ऐसा नहीं है कि ये लोग AC (एयर कंडीशनर) नहीं खरीद सकते. दरअसल इन लोगों को कभी ऐसी की जरूरत ही नहीं पड़ी. क्योंकि यहां का तापमान शहर की अपेक्षा  बहुत कम है.
 आगरा: इन दिनों उत्तर भारत समेत कई शहरों में गर्मी ने अपने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. आगरा भी उस लिस्ट में शामिल है. यहां 124 सालों का रिकॉर्ड टूटा है. 124 सालों में दूसरी बार आगरा का तापमान 48 डिग्री के पार जा पहुंचा है. आगरा उबल रहा है .गर्मी से लोग परेशान हैं. गर्मी से बचने के लोग उपाय खोज रहे हैं. AC (air conditioner) की दुकानों पर लोगों की भीड़ लगी हुई है. लेकिन इन सभी के उलट आगरा दयालबाग की एक दर्जन कॉलोनियों में आज भी AC नहीं है .
 आपको शायद यकीन न हो, लेकिन ये सच है. यहां आज भी AC लगाने पर पाबंदी है. ऐसा नहीं है कि ये लोग AC (एयर कंडीशनर) नहीं खरीद सकते. दरअसल इन लोगों को कभी ऐसी की जरूरत ही नहीं पड़ी. क्योंकि यहां का तापमान शहर की अपेक्षा कम है. इन कॉलोनी में आईएएस, आईपीएस और कई सारे जज भी रहते हैं. जो गर्मियों में सिर्फ कूलर और पंखे से कम चलाते हैं. 
 पेड़ लगाने से हो गया तापमान कम 
आगरा सिटी के बीचों-बीच में दयालबाग स्थित है. यहां पर 50 से 90 साल पुरानी लगभग एक दर्जन कालोनियां है. शहर की अपेक्षा इन कॉलोनी के तापमान में  kafi कमी देखने को मिलती है .इसके पीछे की वजह यहां का शानदार इको सिस्टम और हरियाली युक्त माहौल. यहां हर घर के आगे पेड़ लगे हैं. साथ ही घरों की बनावट ऐसी है कि वेंटिलेशन अधिक होने की वजह से हवा और नमी रहती है . घरों तापमान भी बेहद कम रहता है. आसपास की कॉलोनी में अत्यधिक पेड़ लगे हुए हैं. किसी भी घर की छत पर आपको एयर कंडीशनर लटका हुआ नहीं दिखाई देगा

. यह कॉलोनी स्वामी नगर, दयाल नगर, प्रेम नगर ,विद्युत नगर, श्वेत नगर, कार्यवीर नगर, राधा नगर, सरन नगर ,मेहर बाग और DEI कॉलोनी है. इन सभी कॉलोनी में 1500 ज्यादा परिवार रहते हैं. इसमे से किसी के घर में एयर कंडीशनर नहीं लगा है. सिर्फ पंखा और कूलर से काम चलता है. हमने पेड़ लगाए एयर कंडीशनर नहीं… दयाल नगर के रहने वाले एडवोकेट CM सिंह बताते हैं, ‘हमारे घर इसलिए ठंडा हैं क्योंकि हमने पेड़ लगाए air conditioner नहीं. air conditioner परमानेंट सॉल्यूशन नहीं है.

 एक पेड़ कई air conditioner जितनी ठंडक देता है .हमारा घर चारों तरफ से पेड़ों से घिरा हुआ है. धूप कम आती है और अंदर के जो कमरे हैं उनका तापमान भी बेहद कम रहता है. सिर्फ कूलर या पंखे में ही काम चल जाता है. लोगों को चाहिए कि वह air conditioner छोड़कर पेड़ लगाए. दयालबाग है इको फ्रेंडली यहां हर चीज है ऑर्गेनिक राधा नगर के गुरमौज चावड़ा ने बताया कि उनकी कॉलोनी में air conditioner लगाने की इजाजत नहीं है. ऐसा नहीं है कि लोग air conditioner खरीद नहीं सकते. यहां के रहने वाले लोगों को इसकी कभी जरूरत महसूस ही नहीं हुई. क्योंकि पेड़ों की वजह से तापमान बेहद कम है. दयालबाग को इको फ्रेंडली बनाने की यह पहल है. पर्यावरण बचाने में हम सभी का योगदान होना चाहिए .बढ़ता तापमान हम सब के लिए खतरा है.

 इसके लिए दयालबाग के लोगों ने सालों पहले से तैयारी शुरू कर दी थी’. एसी पर्यावरण के लिए घातक कई सालों से दयालबाग में रहने वाले एडवोकेट अमन चौहान बताते हैं कि air conditioner वातावरण से नमी खींचकर हीट पैदा करता है. किसी भी लिहाज से air conditioner वातावरण के लिए ठीक नहीं है. हमने अपने घरों के सामने पेड़ लगाए हैं. ताजा हवा मिलती है. लोगों से अपील है कि वह air conditioner छोड़े और पेड़ लगाने पर जोर दें;.




In a city boiling at 48 degrees, some colonies still lack ACs, with even IAS officers relying on fans for comfort. Surprisingly, there's no ban on ACs; residents simply never felt the need due to the city's generally lower temperatures. Among these colonies are homes to IAS, IPS, and various judges, who manage with just fans and coolers during summers.

The temperature dropped thanks to planting trees Dayalbagh, situated amidst Agra city, boasts about a dozen colonies ranging from 50 to 90 years old. These colonies maintain lower temperatures compared to the rest of the city due to their lush greenery and eco-friendly environment. Every home here is surrounded by trees, aiding ventilation and maintaining cooler indoor temperatures. These colonies, like Swami Nagar, Dayal Nagar, Prem Nagar, Vidhyut Nagar, Shwet Nagar, Karyaveer Nagar, Radha Nagar, Sarnai Nagar, Meher Bagh, and DEI Colony, accommodate over 1500 families, none of whom rely on ACs. Fans and coolers suffice for their needs.

"We planted trees instead of installing ACs..." Residents like Advocate CM Singh from Dayal Nagar affirm that their homes remain cool without ACs due to abundant tree cover. Trees provide natural cooling, making ACs unnecessary. Their homes are surrounded by greenery, reducing direct sunlight and maintaining comfortable temperatures inside. They advocate for planting trees over relying on ACs.

Eco-friendly Dayalbagh: everything here is organic Gurmouj Chawda from Radha Nagar mentions that their colony prohibits AC installations, not because residents can't afford them but because they've never felt the need. Trees keep temperatures low, making Dayalbagh an eco-friendly neighborhood. They emphasize the importance of environmental conservation and urge others to prioritize tree planting to combat rising temperatures.

ACs are harmful to the environment Advocate Aman Chauhan, a long-time resident of Dayalbagh, highlights how ACs contribute to environmental degradation by expelling heat. He advocates for tree planting as a sustainable alternative to combat rising temperatures and urges people to reconsider their reliance on ACs.



likho jo bhi likhna hai

#लिखना_है?
तो लिखो उस फीमेल डॉग की आँखों के बारे में जिसके पिल्ले का धड़ सड़क से गुज़र रहे टायरों में थोड़ा-थोडा चिपक चिपक कर साफ़ हो रहा है !

लिखो उस शर्मिंदा हिजड़े के नाक के पसीने के बारे में जो सब कुछ होना चाहता है सिवाय एक हिजड़े के !

तुम लिख सकते हो उस जवान हाथ की कंपकंपाहट जो ब्लेड लिए नस काटने के नफे-नुक्सान को तौल रहा है !

कभी लिखकर देखो उस चिड़िया के फडफडाते परों के बारे में जो एक चील को अपने सामने से अपना बच्चा दबोचते हुए देख रही है !

या लिखो उस मुर्गे के कानों के बारे में जो ध्यान से सुन रहा है दो ग्राहकों की झटके और हलाल की डिबेट !

तुम लिखो एक झोपड़ी में रात भर चली वो फुसफुसाती अन्ताक्षरी को जो टूटी छत से पानी टपकने की वजह से हो रही है !

तुम लिखकर देखो उस बाँझ आँख की चमक जिसे वाश-बेसिन में पड़ी उलटी में एक उम्मीद की रंगोली दिख रही है !

चाहो तो लिखो शहर की सबसे ऊंची बिल्डिंग की रेलिंग पर खड़े एक हारे नौजवान की उड़ान, वो उड़ान जो वो नौजवान बस लेने ही वाला है !

तुम लिखो आसमान में बिन-मौसम काले बादल देखते हुए एक किसान की बेबसी और वहीँ थोड़ी दूर पर खेत में मिल रहे एक नए जोड़े के चेहरे की बूँदें !

या लिखो शमशान में एक कंधे पर गोल घूम रहे घड़े के छेद से गिरते पानी की छींटें जो सामने पड़ी आग में किसी को जगाने की कोशिश कर रही हैं !

लिखो सब कुछ जो लिखना है मगर एक पतिविहिन औरत की दास्तान भी लिखो जिसके सारे सपने एक पल में धाराशाही हुए हो गये होंगे ,जब उसकी चूड़िया तोड़ी गई होगी,मांग का सिन्दूर मिटाया गया होगा !

लिख सकते हो तो लिखो उस बच्चे के भरोसे के बारे में जो छत से गोल घूम कर बस कूदने वाला है कि शक्तिमान आएगा !

लिखना है कभी तो लिखो उन आंसुओ के बारे मे जो ना जाने किस डर से आंखो की दहलीज पार ना कर सके , और अंदर ही कहीं दम तोड़ गए !

और लिखो उन दोस्तों की ठिठोली के बारे में भी जिन्हें लग रहा है कि ये सिर्फ मज़ाक है !

लिखो दूर गाँव से बड़े शहर आई अकेली उस बूढ़ी औरत के बारे में जिसे अस्पताल में अकेले इलाज कराना एक पूरा जंगल काटने से ज्यादा कठिन लग रहा है !

लिखो उस भिखारी की फैली पुतलियों और अचानक उठे दर्द के बारे में जो सामने से आती एक बड़ी गाड़ी को देखकर बढ़ गया है !

लिखो उस रिश्तेदार के भेडिये जैसे दांतों के बारे में जो एक लड़की को कमरे में अकेले सोते हुए देखकर लार चुवा रहे हैं !

लिखो किसी गार्ड की बोरियत का बहीखाता जिसमे सुबह से एक हजार कार और दो हजार मोटरसाइकिल का डेबिट क्रेडिट हो चुका है !

लिखो उस देहाती ग़रीब की उलझन के बारे में जिसके इकलौते लड़के की आखों में अपनी बारात धूमधाम से बैंड बाजे से साथ गुजरने के ख़्वाब पल रहे है !

लिखो कुछ ऐसा जिसपर किसी का ध्यान नहीं गया! लिखो क्यूंकि तुम्हारे पास बहुत सी कहानियाँ है तुम्हारी आत्मा के हिडन फोल्डर में !

लिखो, जिसको पढ़कर कोई वाह-वाह न करे!  लिखो कि तुम्हारे लिखे का चर्चा न हो! लिखो बस कि अभी बहुत कुछ लिखना है तुम्हे !

shyad aap ka bhi mn kre ki hum paryavan ko surakshit kre

48 डिग्री में उबल रहा शहर, मगर इन कॉलोनियों के किसी घर में AC नहीं, IAS अफसर भी पंखे से चला रहे काम

आपको शायद यकीन न हो, लेकिन ये सच है. यहां आज भी AC लगाने पर पाबंदी है. ऐसा नहीं है कि ये लोग AC (एयर कंडीशनर) नहीं खरीद सकते. दरअसल इन लोगों को कभी ऐसी की जरूरत ही नहीं पड़ी. क्योंकि यहां का तापमान शहर की अपेक्षा कम है.

आगरा: इन दिनों उत्तर भारत समेत कई शहरों में गर्मी ने अपने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. आगरा भी उस लिस्ट में शामिल है. यहां 124 सालों का रिकॉर्ड टूटा है. 124 सालों में दूसरी बार आगरा का तापमान 48 डिग्री के पार जा पहुंचा है. आगरा उबल रहा है .गर्मी से लोग परेशान हैं. गर्मी से बचने के लोग उपाय खोज रहे हैं. AC (air conditioner) की दुकानों पर लोगों की भीड़ लगी हुई है. लेकिन इन सभी के उलट आगरा दयालबाग की एक दर्जन कॉलोनियों में आज भी AC नहीं है .








आपको शायद यकीन न हो, लेकिन ये सच है. यहां आज भी AC लगाने पर पाबंदी है. ऐसा नहीं है कि ये लोग AC (एयर कंडीशनर) नहीं खरीद सकते. दरअसल इन लोगों को कभी ऐसी की जरूरत ही नहीं पड़ी. क्योंकि यहां का तापमान शहर की अपेक्षा कम है. इन कॉलोनी में आईएएस, आईपीएस और कई सारे जज भी रहते हैं. जो गर्मियों में सिर्फ कूलर और पंखे से कम चलाते हैं.




पेड़ लगाने से हो गया तापमान कम
आगरा सिटी के बीचों-बीच में दयालबाग स्थित है. यहां पर 50 से 90 साल पुरानी लगभग एक दर्जन कालोनियां है. शहर की अपेक्षा इन कॉलोनी के तापमान में कमी देखने को मिलती है .इसके पीछे की वजह यहां का शानदार इको सिस्टम और हरियाली युक्त माहौल. यहां हर घर के आगे पेड़ लगे हैं. साथ ही घरों की बनावट ऐसी है कि वेंटिलेशन अधिक होने की वजह से हवा और नमी रहती है . घरों तापमान भी बेहद कम रहता है. आसपास की कॉलोनी में अत्यधिक पेड़ लगे हुए हैं. किसी भी घर की छत पर आपको एयर कंडीशनर लटका हुआ नहीं दिखाई देगा. यह कॉलोनी स्वामी नगर, दयाल नगर, प्रेम नगर ,विद्युत नगर, श्वेत नगर, कार्यवीर नगर, राधा नगर, सरन नगर ,मेहर बाग और DEI कॉलोनी है. इन सभी कॉलोनी में 1500 ज्यादा परिवार रहते हैं. इसमे से किसी के घर में एयर कंडीशनर नहीं लगा है. सिर्फ पंखा और कूलर से काम चलता है.



हमने पेड़ लगाए एयर कंडीशनर नहीं…
दयाल नगर के रहने वाले एडवोकेट CM सिंह बताते हैं, ‘हमारे घर इसलिए ठंडा हैं क्योंकि हमने पेड़ लगाए air conditioner नहीं. air conditioner परमानेंट सॉल्यूशन नहीं है. एक पेड़ कई air conditioner जितनी ठंडक देता है .हमारा घर चारों तरफ से पेड़ों से घिरा हुआ है. धूप कम आती है और अंदर के जो कमरे हैं उनका तापमान भी बेहद कम रहता है. सिर्फ कूलर या पंखे में ही काम चल जाता है. लोगों को चाहिए कि वह air conditioner छोड़कर पेड़ लगाए.



दयालबाग है इको फ्रेंडली यहां हर चीज है ऑर्गेनिक
राधा नगर के गुरमौज चावड़ा ने बताया कि उनकी कॉलोनी में air conditioner लगाने की इजाजत नहीं है. ऐसा नहीं है कि लोग air conditioner खरीद नहीं सकते. यहां के रहने वाले लोगों को इसकी कभी जरूरत महसूस ही नहीं हुई. क्योंकि पेड़ों की वजह से तापमान बेहद कम है. दयालबाग को इको फ्रेंडली बनाने की यह पहल है. पर्यावरण बचाने में हम सभी का योगदान होना चाहिए .बढ़ता तापमान हम सब के लिए खतरा है. इसके लिए दयालबाग के लोगों ने सालों पहले से तैयारी शुरू कर दी थी’.

एसी पर्यावरण के लिए घातक 
कई सालों से दयालबाग में रहने वाले एडवोकेट अमन चौहान बताते हैं कि air conditioner वातावरण से नमी खींचकर हीट पैदा करता है. किसी भी लिहाज से air conditioner वातावरण के लिए ठीक नहीं है. हमने अपने घरों के सामने पेड़ लगाए हैं. ताजा हवा मिलती है. लोगों से अपील है कि वह air conditioner छोड़े और पेड़ लगाने पर जोर दें;.














Saturday 1 June 2024

manik ki kimat bs johri hi jaanta hai

Ek baar ek vyakti ko ek bhut hi pyara ratn mil gya , 
Vo usko le kr sabji vale ke pass gya , bola iske badle kya de sakte ho
Sabji vala bola dekhne me bhut sunder hai , iske badle me me koi bhi ek kilo sabji de sakta hu

Vo ab 
gya , 
Vo usko le kr dukandaar ke pass gya , bola iske badle kya de sakte ho
Dukandaar bola dekhne me bhut sunder hai , iske badle me me koi bhi 5 kg samaan  de sakta hu



Vo usko le kr jeweller ke pass gya , bola iske badle kya de sakte ho
Jeweller bola dekhne me bhut sunder hai , iske badle me me 10000rs de sakta hu


Vo  ab usko le kr  ek johri ke pass gya , bola iske badle kya de sakte 

bola dekhne me bhut sunder hai

Usne us ratan ko liya 

Ek laal resham ka kapda bichaya , us ratn ko us pr rkha  matha teka , 
Va us vyakti se bola me apna sb kuch iske liye de sakta hu , bs ye ratan muje de do
Vo ek beshkimti  ratan mean gem ruby tha , all stones are precious, but the most precious gem is ruby
Called manikya pink colour stone, 
 ,

Thursday 30 May 2024

ina ankhiyan nu lad len de


काले कपड़े पाए hoye ने
उना तेनु लुट लेना जेड़े अपने बनाए होए ने

वे कोई तारा लिशकदिया 
तेरी में  नब्ज़ देखी ,तेनु मरजा इश्क दिया 

इक थाली विच पंज नाखा
मां दिए गोल गपिए तेनु लोंका इच की आंखा

मिटी लग गई ए पैरा नू
नी साढे नाल खा के कसमा, गल ला लिया गैरा  नू

बिजली दी तार होवे 
ओ का दा यार होंदा , जेड़ा सब दा ही यार होवे

फोन सजना दा आया ए
तेरिया जुदाइयां ने सानू मार मुकाया ए

जम्मू शहर अखरोट मिठे
तुसा मथे वट पाया , असा रस्ते ही छोड़ दिते

कोई चुन्नी ए रंग जोगी
आप ते पी दें नहीं 
लेनी यार मलंग योगी, 
Gle vich reshmi chunni payi hoyi e
AJ te mele vich baby doll vi aayi hoyi e
Asi ankha kive meliye ya jodiye
Tusi Kali enak payi hoyi e

Koi reshmi tlayi e
Knjra da kakh na rve .twanu bna Dita Sadi brjayi e

Bijli da khaba ve
Asi tuwadi gli nhi aana tuwade brava pa Lena lamba ve

Mushkil vich km aave 

O kada yaar hya jeda milna to pela hi gum jave 


Gli vich  aaya  dakiya
Sbdi aayi choti Sadi te choti vi nhi  aayi e


Sare bhande Pye kajde aa
JD tusi nhi aana ,asi Eve hi Pye sajde aa


Mushkil di kadiya ne 
Hum te aa ja sajna 
Sanu pe gyiya adiya ne

Koi kn pata peer hove
Satho Sanu le le safe jit sanjog dve
Pave Sadi jind le le 
Sade jit sanjog dve 
Kaan ka ka pya krda e
Asi isda ki kariye je husan tha goli ki awaz thaa tha pya krda e

Bolo awaz asi v layi e 
Jekr tu hun v na aaya ,rvmb Val rsame viday e
E ki khel bnaya e
Dushmna naal Mila ke ramja tusi mku e mukaya e 



Sunday 26 May 2024

बाग में जाने के कुछ उसूल होते हैं

बाग  में जाने के कुछ उसूल होते हैं
फूल से तितली को ना उड़ाया जाए 
घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यू कर ले 
किसी रोते  हुए बच्चे को हसाया जाये  
my originals 26/5/24
c.d.&.c by ritesh nagi

       इसी तरह ऐसे दोस्ती  व प्यार  के भी कुछ उसूल होते है 
हो गयी है गर छोटी सी तकरार  तो 
खामखां  में मुँह न सुजाया  जाये 
अगर लग गयी है किसी को किसी की बात बुरी 
तो उस बात का बतंगड़ न बनाया जाये 

सब को सब कुछ हासिल हो ये जरुरी तो नहीं 
जो हासिल है उस का खुल कर  लुतफ उठाया जाये 
में ही वो शख्स  हु जिसकी थी तलाश तुजे 
 इस वहम को अब ही  से मिट्या जाये 
   
 में तेरे काबिल हु या नहीं ये किसको पता 
तेरे वजूद को क्यों न तुजसे वाकिफ कराया जाये 
में तुजसे  मिलु या न मिलु ये नहीं है मसला 
चल आज तुझको तुजसे ही मिलाया जाये 
तू नरगिस है नजम है खूबसूरत नगमा है 
क्यों न तुजko सारे  आकाश me गुनगुनाया जाये 
 
मेरी हो न हो ,में  रहु न रहु, कोई बात नहीं 
तेरी हर बात को क्यों न सजदे में सजाया जाये 
तेरा आना तेरा मिलना मुकदर की बात सही 
क्यों न तेरा न मिलना भी मुकदस बनाया जाये 
मिलना और मिल कर  बिछड़ना है जगत की रीत  यही 
क्यों न ,ना  मिल कर   बिछुड़ने का दसतूर ही मिटाया जाये 











to be editied 


Ishi trha dosti va pyaar ke kuch usul hote hai
Khamkha me muh na sujaya jaye , 
Agar lg gyi hai kisi ko kisi ki  koi baat buri 
To us baat ka batangr na bnaya jaye , 
Sb ko sb kuch hasil ho ye jaruri to nhi
Jo hasil hai uska khul ke lutf utaya jaye
Me hi vo shakas hu jiski thi talash tuje 
Is veham ko ab hi se mitaya jaye 

Me tere kabil hu ya nhi kisko pta 
Tere vajud se kyo tujko vakif na kraya jaye
Me tujse milu ya na milu ,ye nhi hai masla 
Chl Aaj tujko tujse hi kyo na milaya jaye

Tu Nargis hai najam hai khubsurat nagma hai
Kyo na tujse sare aakah ko sajaya jaye
Meri ho na ho rhevna rhe koi baat nhi 
Teri hr baat ko sajde me sajya laya  jaye
Tera milna mukdr ki baat shi 
Tera na milna bhibkyo na mukdas bnaya jaye 
Milna mil kr bichdna hai reet yhi
Kyo na na mile na mil ke bichdene ka dastur mitaya jaye
में मेरा वजूद  हस्ती मेरे म्मायने मायने नहीं रखते 
 तू तेरा वजूद तेरी हस्ती तेरे मायने  इक नियामत है 
चारो तरफ बिखरा रहे नूर तेरा
हवा में सुगंध तेरी  रहे फैली 
सिर्फ   से निभाया जाये 
 






Friday 1 December 2023

Don't lend money ,give it

LIFE LESSON 

1. Don’t lend money to your family. Give it.

2. Never shake a hand while sitting down.

3. Stop telling people more than they need to know.

4. Never eat the last piece of something you didn't buy.

5. Don't throw your friend under the bus to impress someone.

6. Never insult the cooking when you are the guest.

7. Don't use the urinal next to an occupied one.

8. Don't take out your phone during a conversation.

9. Never take credit for work you didn't do.

10. Listen, nod, and most of all make eye contact.

11. Don't make fun of your friend in front of his kids.

12. Never let emotions overpower you.

13. Never beg for a relationship.

14. Dress well no matter what the occasion.

15. Never kick a man when he is already down. 

Thank you for reading

Sunday 19 November 2023

dona paula jetty goa


  Dona Paula Jetty Goa


Located around 7 kms from Panjim and 5 km from calanguate beach , Dona Paula is one of the most popular tourist place  in Goa famous for its  beautiful  location  The small beach is also popular as the Lover's Paradise

, which provides vast  view of the Arabian Sea and Mormugao harbour. 

there are restuarents and small stalls in the beginning of this beautiful place ,parking is also available ,shopping stalls and small shopes ,water activites are also done here , one can buy tickets for water activities from the counters in the begining


Ajay devghans fims singam shooting was done here 


 we   have to buy entery tickets for the entery in this place 



paid parking is availble here 



     have to buy entery tickets 

Ajay devghans fims singam shooting was done here 





              singam shooting place .tourist and general people do stay  at this place for some time  to enjoy the beauty and scenes  of this place for some moments


   photographer is always there to capture your moments and ready to give you prints of your beautiful pics in a moments at very nominal price 






                          dona paula and jetty statues 












        a beautiful sun set can be seen from here    








Friday 10 November 2023

वाह प्रभु तेरे नजारे

वाह प्रभु तेरे नजारे
किसी तो मरे को जिन्दा कर  दे
किसी जिन्दा को जिन्दा ही मारे

एक गांव में किसान रहता था उसका नाम था सुखीराम उसकी पत्नी का नाम था धनिया, सुखी राम बहुत ही मेहनती इंसान  था।  सुखीराम   सारा दिन खेत पर खूब  मेहनत करता और शाम को जब घर वापस आता तो उसकी पत्नी शिकायत का पुलिंदा  लेकर बैठ जाती ,इससे  उसको बहुत गुस्सा आता। 



वह  धनिया को  बहुत समझता कि मैं थक हार आया हूं मुझे चाय दो पानी दो खाना दो और आराम करने दो. लेकिन उसकी पत्नी की आदत थी वह उलाहने दिया बगैर रहती ही नहीं थी।  इसलिए अक्सर उन दोनों में खूब झगड़ा व  बहस हो जाती थी और दुखी होकर  सुखी राम धनिया को पीट दिया करता था धनिया पिटने  के बाद  उसे हर बार कहती थी कि मैं एक दिन तुम्हें छोड़कर मायके चली जाऊंगी फिर नहीं आऊंगी। 




 एक दिन सुखी राम को जब उसने खूब सताया तो सुखी राम ने कहा चल मैं तुझे आज  तेरे मायके में ही छोड़ कर आता हूं और वह दोनों  कुछ देर बाद समान लेकर  धनिया के  मायके को निकल पड़े। रास्ते में सुखीराम  को प्यास लगी ,जंगल में एक  कुआं था पानी लेने के लिए सुखी  जैसे ही झुका धनिया ने उसे पीछे से धक्का देकर कुएं में गिरा दिया और  वहां से अपने मायके चली गई 
 सुखी राम को तो जीने मरने की नौबत आ गई सुखी  राम कुएं  में से  ही  बचाओ बचाओ बचाओ तेज तेज छिलने लगा ,, उसकी किस्मत अच्छी थी एक राहगीर वहां से निकल रहा था तो उसने किसी तरह से  उसे कुए से बाहर निकाल दिया।  सुखीराम वहां से निकलकर सीधा अपने घर गया घर वालों को बताया कि वह अपनी पत्नी को मायके छोड़ आया और रास्ते में कहीं गिर गया था इसलिए उसे थोड़ी सी चोट लग गई और वह आराम करने चला गया। 
अगले दिन से रोज खेत पर जाकर पहले की तरह से काम करने लग गया उसने यह बात किसी को बिल्कुल भी नहीं बताई जो जंगल में उसके साथ हुयी थी। 

जब  काफी दिन बीत गए सुखी राम अपनी पत्नी को लेने गांव नहीं गया तो   तो उसके घर वालों ने भाइयों ने उसके पिता ने उसकी मां उसे  कहा की बहुत दिन हो गए है  जाकर बहू को ले आये।  सुखी  राम बात को टालमटोल करता रहा। 

जब और भी काफी दिन बीत गए सुखीराम के पिता ने उसे सख्ती  से कहा कि जाकर बहू को ले आये  ऐसे  अच्छा नहीं लगता,,, सुखी राम को धनिया को लेने उसके गांव में जाना पड़ा। सुखीराम जैसी धनिया के घर पहुंचा  धनिया की  उसको देखकर  चीख निकल गई।  वहां  का माहौल यह था कि उसके घर वालों को लग रहा था कि दोनों में कोई झगड़ा हो गया और सुखीराम उसे  लेने कभी भी नहीं आएगा। 

तो शायद सुखी राम को देखकर खुशी से इसकी चीख निकल गई है लेकिन सच तो धनिया को व  सुखी राम को पता था कि उसकी चीज क्यों निकली है।  खैर धनिया व  सुखी राम ने किसी को भी कुछ भी नहीं बताया,, सुखी  धनिया को लेकर चुपचाप अपने गांव आ गया पूरे रास्ते दोनों ने कोई भी बात नहीं की। 

धनिया के दिमाग में बात थी कि अगर इसने यह बात किसी तरह से साबित कर दी कि मैं इसे धक्का देकर जान से मारने की कोशिश की है तो सजा हो जाएगी,बेइज़्जती होगी , साडी जिंदगी मायका व ससुराल उसे जलील करेंगे ,इसलिए उसने अब अपने मुँह को ता ला लगा लिया ,कभी कभी उसे  लगता था की शयद सुखी की यादाशत चली गयी है जो उसे वह  घटना  याद ही नहीं है। 
लेकिन अब दोनों में बिल्कुल भी लड़ाई झगड़ा नहीं होता था क्योकि धनिया अपना मुँह खोलती ही नहीं थी किसी भी बात के लिए ,, दोनों बात ही नहीं करते थे एक दूसरे से धनिया  ने उसे   ताने मारने बंद कर दिए थे

वक्त बीतता गया दुनिया के दो पुत्र हुए बड़े हुए जवान हुए  व  काम करने साथ जाने लगे फिर उनकी शादियां हुई उनके भी बच्चे हो गए और उनके परिवार सुख से जीवन बिता  रहा था ,, लेकिन इस दौरान कभी भी सुखी राम ने धनिया को ना कभी भी किसी और को कोई भी बात नहीं बताई। 

लेकिन इन 20-25 सालों में धनिया के जीवन में सुखीराम के जीवन में एक बदलाव आया कि उसकी पत्नी सुखी की  खूब सेवा  करती  बच्चो  से व बहुओं से भी करवाती 

 सुखीराम को उसकी छोटी बहु  खेत पर खाना देने जाती थी तो सुखीराम मन ही मन मुस्कराता व गुनगुनता   वाह  प्रभु तेरे नजारे किसी को मारे  किसी को तारे अपने तो मजे हैं सारे ही सारे। 
बहु  रोज देखती  कि जब भी मैं इसे खाना देती  हूँ यह कुछ ना कुछ गुनगुनाता   है , तो उसे एक दिन ऐसा महसूस होने लग गया कि जैसे वह उसे छेड़ता है , उसने आखिर हार  कर यह बात अपने पति को बताई पति ने अपनी मां को बताई , . माँ ने कहा  की  नहीं ऐसा नहीं हो सकता सुखी राम ऐसा व्यक्ति नहीं है हम ऐसा करते हैं आपसे दूसरी बहू को खाना देकर भेजा करेंगे ,तब देखते है क्या होता है। 

अब दूसरी बहू खाना लेकर जाने लग गई खेत पर तो  फिर सुखीराम मन ही मन मुस्कराया  व गुनगुनया    वाह  प्रभु तेरे नजारे किसी को मारे  किसी को तारे अपने तो मजे हैं सारे ही सारे। 

दूसरी बहु ने  जाकर यह बात पति को और सास को बताई तो उन्होंने फैसला किया कि अब तो इससे बात करनी ही पड़ेगी कि इसका दिमाग खराब हो गया जो बहूयो  को छेड़ता है उनसे गलत तरीके से बातें करने की कोशिश करता है। 


और उस  दिन उन्होंने घर के अंदर ही पंचायत लगा ली और धनिया ने   सुखी राम को कहा कि बता  तू ऐसे क्यों करता है सुखी राम ने बहुत टा लने की कोशिश उसने कहा ऐसा कुछ भी नहीं है मेरे लिए बहुये  बेटियों के समान है,,मेने  कभी किसी के बारे में  गलत नहीं सोचा ,बहुओं ने  कहा फिर आपको इस बात का जवाब देना ही होगा कि आप ऐसा क्यों बोलते हो नहीं तो हम सब घर  छोड़कर जा रहे हैं
आप अकेले ही रहो इस घर में

मजबूर होकर सुखी राम को उनको सारी बात बतानी पड़ी की किस तरह से धनिया  तुम्हारी मां लड़ाई झगड़ा करती थी, दोनों जंगल से जा रहे थे ,, धनिया ने   मुझे धक्का दिया,किसी राहगीर ने  मेरी जान बचाई ,,,दिमाग काम क्र गया मेरा ,मैंने उसका आज भी एड्रेस लेकर रखा हुआ है ,, जरूरत पड़े तो तुम जाकर उसे मिलकर सारी घटना के बारे में पूछ सकते हो
बच्चों ने मां से पूछा ,क्या यह सब सच है ,,धनिया ने कहा  की हां ऐसा मैंने किया था मैं मानती हूं मेरी गलती है मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था। 

अब बच्चो ने पिता से पूछा की वो ये क्यों गुनगुनाते है की,,,,,   वाह  प्रभु तेरे नजारे किसी को मारे  किसी को तारे अपने तो मजे हैं सारे ही सारे। 

 तो सुखी राम बोलै देखो में मर क्र जिंदा हो गया ,तुम्हारी माँ जो बहुत ही बोलती थी गरजती थी , अपने  कुकर्म के कारण   जिन्दा हो कर भी मृत सामान हो गयी ,हर समय दृ रहती थी पोल न  खुल जाये , में खुल कर जीने लगा ,,ये मर मर कर ,, मेंने बात परिवार की व पत्नी की भलाई के लिए कभी किसी को नहीं बताई ,उसक मुझे फल मिला तुम दो बेटे व दो  बहुये ,ये प्यारे प्यारे पौत्र  व पोत्रिया , इस लिए में ऐसा बोलता हूँ ,
जब हम किसी भलाई के लिए अपना दुःख छुपा या पि जाते है तो हमे बदले में बहुत कुछ बहुत अच्छा   मिलता है ,




आज से लगभग 70 साल पहले जिस सिद्धांत बच्चो की परवरिश होती थी वो था आज्ञा का सिद्धांत, आदेश आधारित सिद्धांत Instruction based theory,


किसी भी बड़े ने अगर अपने से  छोटे को कुछ कह दिया तो छोटा उसे बिना किसी न नुकर के मान लेता था, वो बड़ा कोई भी हो सकता था, दादा,दादी,पापा , ताया, बड़ा भाई कोई भी


फिर आया discussion based theory, विचार विमर्श का सिद्धांत अगर किसी बड़े ने माता ने ,पिता ने ,दादा ने या बड़े भाई ने अपने से छोटे को कुछ कहा,तो ,अगर छोटे को ठीक  नहीं लगा तो विचार विर्मश होता था


 ।अगर बड़ों ने कुछ कह दिया तो ,बात होती थी,ऐसा क्यों , या ऐसा क्यों नही,
अगर छोटे को बात नही भी समझ आती थी ,वो कह देते थे हमे समझ नही आया पर क्योंकि आप कह रहे है तो हम मान लेते है ।


फिर आया debate based theory, मां बाप ने कुछ कहा नहीं की बस बहस शुरू हो गई,
यानी की बहस का सिद्धांत, अब कोई भी बड़ा अपने से छोटे को कुछ भी कहे,बिना बहस मामला नही निबटता था।
मां बाप ने कहा प्रणाम करो,तो क्यों करे, भगवान है,तो जरूरी है सिर्फ यहीं है,कल तो कह रहे थे hr जगह है,
प्रणाम करो भगवान आशीर्वाद देगे,अच्छा तो प्रणाम नही करेंगे तो आशीर्वाद नही देगे, तो फिर भगवान कैसा,
बस आप एक बात बोलो बहस शुरू,
इस बहस के साथ एक बात और हुई इस पीढ़ी को ये गलत फहमी हो गई की हमे अपने मां बाप से ज्यादा अक्ल va समझ है,


अब आया चौथा चरण deny based theory, मां बाप ने कुछ भी कहा,सुना भी नही सही से बस सीधा ना, 
इस समय यही दौर चल रहा है जिसका परिणाम आया कलह

अब चल रहा है कलह का सिद्धांत, अब कोई भी बड़ा किसी अपने छोटे को कुछ भी कहे, सीधा जवाब मिलता है न, और फिर शुरू होती है बहस और फिर कलह , और धीरे धीरे मां बाप और बच्चो के बीच में हर बात पर कलह होनी तो अब पक्की जैसी बात हो गई है ।
मां बाप घर में बच्चो को संस्कार दे रहे है,परंपरा समझा रहे है,समजायिश दे रहे है ,वो दो पल को समझते भी है, तो
जब घर से बाहर जाते है तो वहां दुष्कर्मों की,दुराचारों की व्यसनों की, वासना की आंधी ,तूफान थपेड़े चल रहे है,
केसे बचाएंगे इन बच्चो को ,सुनते ये है नहीं, हर बात पर बहस ये करते है।
जिन जवान बच्चो को देख कर कभी बाप की छाती चौड़ी हो जाती थी,मां का चेहरा खिल जाता था, आज बाप डर जाता है मां घबरा जाती है ,की पता नहीं कब किस बात पर अभी बहस शुरू हो जाए कलेश पड़ जाए,
इन बच्चो को देख कर लगता है 
अभी रोशनी दो कदम ही गई है
दिए को किसी की नजर लग गईं है।
केसे बचाएंगे इन बच्चो को 

यह सबसे खतरनाक सिद्धांत है जिस   आज कल की पीढ़ी चल रही है , 

ज्ञान,,,knowledge                ज्ञान,,,knowledge             ज्ञान,,,knowledge        ज्ञान,,,knowledge



भारत की इस श्रापित नदी के बारे आप जानते है क्या

भारत की इकलौती नदी जिसे लोग अपवित्र मानते है वा छूने से भी डरते है।

एक नदी को यमराज की बहिन व सूर्य की पुत्री कहा जाता है।

नदियों का मायका है यह राज्य

क्यों सास बहू कहा जाता इन नदियों को 

दुनिया का इकलौता मंदिर जंहा भगवान् शिव गोपी के रूप में वास करते है

कुत्ते जीभ बाहर अक्सर क्यों निकाल रखते है। why most of the times dogs keep their mouth open and tongue outside

ट्रैफिक उलंघन करने पर कैमरे कैसे पकड़ लेते है ,How cameras control the Traffic violations

क्यों केवल एक नदी है जिसे पुरुष नदी माना जाता है /why only one river in India is called male river

क्यों उलटी बहती है भारत की यह नदी /why this river flows in opposite direction

कृष्ण सुरदर्शन धारी थे karm ka fal

आखिर सच हो ही गयी अल्बर्ट आइंस्टीन की १०० वर्ष पहले की गयी भविष्यवाणी ,खुलेंगे बहुत से नए रहस्य व राज ब्रह्माण्ड।

ज्ञान जन्मो जन्मो तक रहता है knowledge remains as eternal